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यह हमेशा से पेचीदा रहा है कि कैसे सांप्रदायिक, संकीर्ण और उदारवादी विचारधारा के बीच के अंतर को समझा जाए। ये सभी एक-दूसरे से अलग हैं। हालांकि, सांप्

लोक सुरक्षा कानून यानी पीएसए का इस्तेमाल करके जम्मू और कश्मीर में नेताओं को नजरबंद किया गया है। इससे पता चलता है कि कश्मीर के मसले पर केंद्र सरकार

दिल्ली विधानसभा चुनाव में आम आदमी पार्टी की कामयाबी की कई तरह से आलोचनात्मक व्याख्याएं हुई हैं। जो लोग खुद को ‘कट्टर धर्मनिरपेक्ष’ मानते हैं, उन्हे

दिल्ली विधानसभा चुनावों में विचारधारा के स्तर पर विरोध के बीच जनता की आवाज को सुन पाना मुश्किल है। मुकाबला राजनीति के दो माॅडलों के बीच है। एक माॅड

दिल्ली विधानसभा चुनावों में विचारधारा के स्तर पर विरोध के बीच जनता की आवाज को सुन पाना मुश्किल है। मुकाबला राजनीति के दो माॅडलों के बीच है। एक माॅड

व्यवस्था के खिलाफ अगर कोई भी वैचारिक, राजनीतिक, साहित्यिक और सामाजिक विरोध हो तो इसके कई मतलब निकाले जाते हैं और इस प्रक्रिया में नामोल्लेख भी होता

हाल तक यह समझ बरकरार थी कि भारतीय संविधान एक महत्वपूर्ण नियामक दस्तावेज है जिसे 26 जनवरी, 1950 को महत्व हासिल हुआ। इस दिन विजय पथ पर जिस तरह से सैन

24 जनवरी को केंद्रीय गृह मंत्रालय ने एल्गार परिषद मामले को महाराष्ट्र पुलिस के हाथों से लेकर राष्ट्रीय अन्वेषण अभिकरण यानी एनआई को देने का निर्णय ल

नागरिकता संशोधन कानून के खिलाफ जो विरोध चल रहा है उससे संविधान की प्रस्ताव की शुरुआत के शब्द ‘हम लोग’ को दो अवधारणाएं दी हैं। प्रस्तावना की शुरुआत

आॅस्ट्रेलिया के पारंपरिक विमर्श में जंगलों की आग का जिक्र होता है। यहां तक की कहानियों में भी इनका जिक्र है। लेकिन जलवायु संकट की वजह से ये आग काबू

दिसंबर, 2019 में उपभोक्ता मूल्य सूचकांक में 14.12 फीसदी की बढ़ोतरी हुई। यह पिछले छह साल में सबसे अधिक है। इससे खुदरा मूल्यों में तेजी देखी जा रही है

7 नवंबर, 2019 को जो वित्तीय स्थिरता और विकास परिषद यानी एफएसडीसी की जो बैठक हुई, उसके एजेंडे में मुख्य बात यह रही कि देश के वित्तीय क्षेत्र के समाध

अनुराधा भसीन मामले में उच्चतम न्यायालय ने जो फैसला दिया है, उसे पढ़ना परेशान करता है। जम्मू कश्मीर से अनुच्छेद-370 हटाए जाने के बाद वहां इंटरनेट बंद

नागरिकता संशोधन कानून पर देश भर में जो विरोध-प्रदर्शन चल रहे हैं, उन्होंने जन विरोध को एक नया आयाम दिया है। ये प्रदर्शन दो मायने में जनविरोध को व्य

वैश्विक स्तर पर विश्वविद्यालयों में जो बदलाव हो रहे हैं, उससे उच्च शिक्षा में अवसर बढ़ते जा रहे हैं। अब भारत के छात्र किसी प्रतिष्ठित वैश्विक विश्वव

सरकार द्वारा कई कदम उठाने के बावजूद जुलाई-सितंबर, 2019 के दौरान भारतीय अर्थव्यवस्था में मंदी और गहराई। पहली तिमाही के 5 प्रतिशत के मुकाबले दूसरी ति

जब तक कोई निर्मम घटना नहीं हो जाती है तब तक हम मूकदर्शक बने रहते हैं। इसके बाद हम रातोंरात न्याय के लिए लड़ने वाले योद्धा में तब्दील हो जाते हैं। है

केंद्र सरकार ने 15 दिसंबर, 2019 से भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण के तकरीबन 500 टोल प्लाजा में से 90 प्रतिशत से अधिक पर फास्टैग को अनिवार्य कर

नागरिकता संशोधन कानून के पारित होने के बाद के घटनाक्रम ने मौजूदा सरकार के चरित्र और जनता के धैर्य को उजागर किया है। इस कानून और नागरिकों के राष्ट्र

नागरिकता संशोधन कानून के विरोध में जो प्रदर्शन हुए उन पर सरकार की प्रतिक्रिया ने हिंसा के जटिल चरित्र को उभारा है। विरोध-प्रदर्शनों के मौजूदा संदर्

मई, 2019 में लोकसभा चुनावों में जीत के बाद विधानसभा चुनावों में झटकों का सामना कर रही भारतीय जनता पार्टी के लिए झारखंड विधानसभा चुनावों का नतीजा एक

किसी भी सरकार के लिए कर सुधार से राजस्व के मामले में पैदा होने वाली अस्थिरता चिंता की वजह रही है। इसलिए ऐसे सुधारों के प्रति सहमति बनाने के लिए नुक

मैं इस स्पष्टीकरण के साथ अपनी बात शुरू करना चाहूंगा कि यहां मेरी भविष्यवाणी चुनावी अनुमानों से संबंधित नहीं हैं जिसमें विशेषज्ञ चुनाव परिणाम को लेक

नागरिकता संशोधन कानून और राष्ट्रीय जनसंख्या रजिस्टर को लेकर देश भर में विरोध-प्रदर्शन चल रहे हैं। लेकिन जहां भारतीय जनता पार्टी की सरकार है, वहां क

किसानों के संकट का राजनीतिकरण होने की वजह से सरकारों के लिए किसानों की कर्ज माफी एक अनुकूल नीति बन गई है। बढ़ते कर्ज के दबाव और उचित मूल्य नहीं मिल

नागरिकता संशोधन अधिनियम के विरोध में जो प्रदर्शन हुए, उसके बाद जो हिंसा उपजी उसके बाद केंद्र सरकार और उत्तर प्रदेश सरकार के प्रवक्ताओं ने बार-बार ह

अमेरिका की ओर से 3 जनवरी को किए गए एक ड्रोन हमले में ईरान के इस्लामिक रिवाॅल्यूशनरी गार्ड काॅप्र्स यानी कुदस फोर्स के मेजर जनरल कासिम सोलेमानी और इ

5 जनवरी, 2020 को कुछ नकाबपोश लोगों ने जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय के छात्रों और शिक्षकों पर निर्मम हमले किए। ये लोग परिसर में शांतिपूर्ण सभा कर रह

एक संस्थान के तौर पर विश्वविद्यालय सिर्फ अपने बूते नहीं चलते हैं। अगर वे खुद को एक विचार के तौर पर बहुतों के लिए आकर्षक बनाते हैं तो वे विभिन्न क्ष

बलात्कार के चार आरोपियों के पुलिस मुठभेड़ के बाद पुलिस और तेलंगाना सरकार को थोड़ी विश्वसनीयता हासिल हुई होगी। इससे पीड़िता के परिजनों को भी थोड़ी र

भारत के शहरों में आग लगने की कई दुर्घटनाएं हुई हैं। अस्पतालों में भी कई ऐसी घटनाएं हुई हैं। रेस्टोरेंट, पब और छोटे—बड़े होटल भी इसके शिकार हुए हैं।

नागरिकता संशोधन विधेयक को संसद की दोनों सदनों ने पारित कर दिया। हालांकि, यह विधेयक संविधान के बुनियादी ढांचे के खिलाफ है और इससे देश का सामाजिक तान

यह चिंता की बात है कि भारतीय राजनीति में निराशावाद का उभार हो रहा है। ये प्रक्रियागत के साथ तत्वों के स्तर पर भी दिख रहा है। शपथ दिलाने के लिए अजीब

महाराष्ट्र विधानसभा चुनावों के नतीजे आने के महीने भर से अधिक बाद प्रदेश में एक नई सरकार बनी। शिव सेना, राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी और कांग्रेस की ग

फिर से एक बार चुनावी बाॅन्ड को लेकर हो-हल्ला क्यों मचा है? क्या हमें यह नहीं मालूम है कि इसे कई कानूनी हेरफेर के जरिए सरकार ने लाया था?

महाराष्ट्र की राजनीतिक स्थिति दो बातों पर आधारित होकर तीन पार्टियों कांग्रेस, राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी और शिव सेना को साथ ले आई है। इसमें पहली ब

हमारा लोकतंत्र निगरानी में है। आम लोग अगर संविधान के दायरे में अभिव्यक्ति की आजादी का इस्तेमाल कर रहे हैं तो इसे राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए खतरा नहीं

खुदकुशी करने वाले छात्रों की संख्या बढ़ती ही जा रही है। खुदकुशी के अलग—अलग मसले अलग ढंग के हैं लेकिन इसमें दो बातें समान हैं। इसमें पहली बात यह है

20 से 27 सितंबर, 2019 के बीच चले जलवायु परिवर्तन हड़ताल से पुरानी बात ध्यान में आती है। इसमें कहा गया है कि हमने धरती अपने पूर्वजों से नहीं हासिल की

अक्सर हमारी दृष्टि यह तय करती है कि हम क्या देखते हैं। कुछ लोग ऐसे भी होंगे जो 1841 में ब्रिटेन में स्थापित कंपनी थाॅमस कुक के नाकाम होने को ब्रिटे

स्वच्छ भारत अभियान की वजह से दो जरूरी बातों से हमारा ध्यान नहीं भटकना चाहिए। पहली बात यह कि कचरा उठाने वाले चर्चा में आ गए हैं। क्योंकि कुछ प्रमुख

राष्ट्रीय अपराध रिकाॅर्ड ब्यूरो यानी एनसीआरबी के आंकड़ों पर देश में हमेशा से संदेह किया जाता है। 1990 के बाद से जब आपराधिक गतिविधियों में कमी के आंक

बाबरी मस्जिद विवाद मामले में उच्चतम न्यायालय के फैसले के बारे में यह कहा जाता है कि इसके बाद जिस तरह की शांति है, वे भी उतनी ही मजबूती से अपनी बात

हाल ही में सर्वोच्च न्यायालय से अयोध्या मामले में आए फैसले के बारे में काफी कुछ कहा गया। यह फैसला उस विवाद से संबंधित है जिसमें कंक्रीट के एक ढांचे

आरसीईपी से भारत के बाहर निकलने के निर्णय के बारे में क्या कहा जाए?

यह राष्ट्रीय तौर पर एक शर्म की बात है कि आजादी के कई दशक गुजरने के बाद भी देश को भूख और कुपोषण जैसी समस्याओं से छुटकारा नहीं मिल पाया है। बच्चे, मह

हाल के समय में यह देखना मुश्किल हो गया है कि कोई नेता यह कहे कि उससे किसी राजनीतिक निर्णय लेने में गलती हुई। कई नेता इस तरह की स्वीकारोक्ति में विश

स्वच्छ भारत अभियान की शुरुआत 2 अक्टूबर, 2014 को हुई थी। इसका लक्ष्य यह था कि 2 अक्टूबर, 2019 को पूरे भारत को खुले में शौच से मुक्त कराना है। यह विड

21 अक्टूबर को होने वाले महाराष्ट्र विधानसभा चुनावो के लिए प्रचार अभियान जोर पकड़ रहा है। पिछले कुछ हफ्तों के घटनाक्रम से चुनावों में अनिश्चितता बढ़ी