थाॅमस कुक को विदाई

एक गुजरे जमाने के कारोबारी माॅडल और एक परेशान सरकार ने थाॅमस कुक को बर्बाद कर दिया

 

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अक्सर हमारी दृष्टि यह तय करती है कि हम क्या देखते हैं। कुछ लोग ऐसे भी होंगे जो 1841 में ब्रिटेन में स्थापित कंपनी थाॅमस कुक के नाकाम होने को ब्रिटेन के पूंजीवाद की अति का परिणाम मानेंगे। ब्रिटिश होम स्टोर्स और राॅयल बैंक आॅफ स्काॅटलैंड के नाकाम होने के पीछे वैसे अधिक पगार वाले प्रबंधक थे जिन्होंने कंपनी बंद करने से पहले संपत्तियों को बेचा और पेंशन योजनाओं पर कहर बरपाया। क्या थाॅमस कुक भी तेज और ढीली पूंजीवाद का शिकार बन गया?

माली हालत खराब होने के बावजूद थाॅमस कुक के बोर्ड ने शेयरधारकों को न सिर्फ लाभांश दिया बल्कि मुख्य कार्यकारी अधिकारी पीटर फैंकहाउजर को पिछले चार 84 लाख पाउंड का पैकेज भी दिया। अब जांच में पता चलेगा कि पेंशन का पैसा बचा है या उसमें से भी पैसे निकाले गए। लोगों की नौकरियां गईं। छुट्टियां बर्बाद हुईं। लेकिन थाॅमस कुक की कहानी लालची कारोबार के खांचे में पूरी तरह से फिट नहीं बैठती। पेंशन फंड के न्यासियों ने प्रबंधन के आखिरी बेल आउट योजना का तीखा विरोध किया।

कुछ लोग कह सकते हैं कि इस कंपनी की नाकामी की एक वजह ब्रिटेन और यूरोप के बीच चल रहा विवाद है। बोरिस जाॅनसन की सरकार ने कंपनी की ओर चीजें ठीक करने के बीच के लिए मांगे गए 15 करोड़ पाउंड मांग ठुकरा दी थी। अगर यह मांग मान ली गई होती तो 9000 नौकरियां बच सकती थीं। इसकी जगह ब्रिटेन की सरकार ने ‘डनकिर्क की तरह’ अपने यहां के उन 1.5 लाख लोगों को वापस देश लाने का अभियान शुरू किया जो छुट्टियों के लिए दूसरे देशों में थे। हालांकि, जर्मनी ने थाॅमस कुक की वहां की सहयोगी कंपनी कोनडोर को 38 करोड़ पाउंड की मदद की ताकि कंपनी चलती रहे और अपनी मूल कंपनी से अलग होकर काम कर सके। इस वजह से छुट्टियों पर गए जर्मनी के 1.4 लाख लोगों को आनन-फानन में बुलाने की जहमत नहीं उठानी पड़ी।

कुछ लोग थाॅमस कुक को ब्रेग्जिट को पहला शिकार मानेंगे। साल भर पहले तक कंपनी 9 अरब पाउंड की सेवाएं दे रही थी। उसके पास 1.9 करोड़ ग्राहक और 22,000 कर्मचारी थे। 23 सितंबर, 2019 को जब कंपनी बंद हुई तो उस वक्त तक कंपनी के बैलेंस शीट में 3 अरब डाॅलर का घाटा था। ब्रेग्जिट, कमजोर पाउंड और अधिक समय तक चली गर्मियों की वजह से ब्रिटेन के लोग 2019 में घरों में ही रहे। अधिक समय तक चली गर्मियों में ब्रिटेन के शेयर बाजार को 16 अरब पाउंड यानी कुल मूल्य के आधे का नुकसान उठाना पड़ा है। इसका नुकसान थाॅमस कुक के साथ-साथ तुई, रेनियर और ईजीजेट जैसी कंपनियों को भी हुआ है। आठ साल पहले इस कंपनी ने खुद को दिवालिया होने से बचाया था। 2011 में कंपनी को आपात स्थिति में बैंक से कर्ज लेना पड़ा था और 2013 में शेयरधारकों से 42.5 करोड़ पाउंड जुटाने पड़े थे।

थाॅमस कुक किसी चीज का पहला शिकार नहीं था। बल्कि यह इंटरनेट के आखिरी शिकारों में एक है। इंटरनेट की शिकार हुई दूसरी कंपनी मोनार्क एयरलाइंस के पूर्व प्रबंध निदेशक टीम जींस के शब्दों में कहें तो डिजिटल जगत में इसका कारोबार एनालाॅग था। छुट्टियों पर जाने वाले यात्रा एजेंट की जगह इंटरनेट की मदद से खुद ही योजना बनाने के अभ्यस्त हो गए हैं। एयरबीएनबी, ट्रिपएडवाइजर और दूसरी ऐसी स्वतंत्र कंपनियों ने इस क्षेत्र को पूरा बदल दिया है। पहले इस कंपनी की 500 शाखाएं इसकी ताकत थीं। लेकिन आॅनलाइन यात्रा एजेंटों से मिल रही चुनौती की वजह से यही ताकत बोझ में बदल गई। थाॅमस कुक अपने पुराने कारोबारी माॅडल पर चल रही थी जिसमें वह गर्मियों के लिए होटल बुक करने के लिए काफी पहले पैसे दे रही थी। जबकि आॅनलाइन प्रतिस्पर्धियों ने बेहतर शर्तों पर इन सुविधाओं के लिए मोलभाव किया और खुद को उपभोक्ताओं की मांग के हिसाब से बदला।

1841 में एक धार्मिक उपदेशक थाॅमस कुक ने 500 लोगों को जमा करके लिसेस्टर से लाॅगबाॅरो तक एक बैठक में जाने के लिए पूरे दिन की यात्रा के लिए योजना बनाई थी। एक शिलिंग देने के बदले जाने वालों को ट्रेन टिकट, दोपहर बाद की चाय और लाइव संगीत का पैकेट मिला था। थाॅमस कुक ने ब्रिटेन में पर्यटन उद्योग स्थापित किया। लेकिन कई बार सबसे पहले शुरू करने वाले अपनी परंपराओं को बचाए रखने और नई चीजों को नहीं अपनाने की वजह से दिक्कत में पड़ जाते हैं। यात्रा एजेंसियों का कारोबार ढलान पर है। जो सफल हैं, वे सिर्फ यात्रा एजेंट की तरह काम नहीं कर रहे बल्कि एयरलाइन और होटल के कारोबार से भी जुड़े हैं। तुई और सनविंग ऐसे ही उदाहरण हैं। थाॅमस कुक भी विमानन के कारोबार में आई और उसके पास 90 विमान थे। लेकिन दूसरी कंपनियों की तरह यह इसमें सफल नहीं हुई।

एक संभावना इस बात की है कि लिलैंड ट्रक्स और राॅयल इनफिल्ड की तरह थाॅमस कुक भारत में नए रूप में बची रहे। कंपनी ने वित्तीय संकट की वजह से 2012 में भारत का अपना कारोबार बेच दिया था। इसके तहत कंपनी ने अपनी पुरानी सहयोगी को 2024 तक सालाना शुल्क के बदले ब्रांड नाम इस्तेमाल करने की सहमति दी थी। अब यह भारत की सबसे बड़ी यात्रा कंपनियों में एक है। पहले यह कंपनी 2020 से अपना ब्रांड नाम बदलने की योजना बना रही थी लेकिन अब यह कंपनी इस नाम का इस्तेमाल करते रहने का अधिकार हासिल कर सकती है। अगर ऐसा होता है तो थाॅमस कुक का नाम तो बना रहेगा लेकिन वह कारोबारी माॅडल नहीं।

Updated On : 4th Dec, 2019

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Biden’s policy of the “return to the normal” would be inadequate to decisively defeat Trumpism.