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हंसी के साथ आलोचना

अगर हर कोई ताकतवर लोगों पर हंसने लगे तो क्या वे सत्ता में बने रहेंगे?

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पत्रकार प्रशांत कनौजिया को हाल ही में एक मजाक के लिए गिरफ्तार किया गया। उनका अपराध यह था कि उन्होंने योगी आदित्यनाथ का सोशल मीडिया पर मजाक उड़ाया। कनौजिया के मामले की तुलना प्रियंका शर्मा के मामले से हुई। भारतीय जनता पार्टी की कार्यकर्ता शर्मा ने ममता बनर्जी का मजाक उड़ाने वाला एक पोस्ट शेयर किया था।

इस गिरफ्तारी के बाद मामले ने तूल पकड़ लिया। इस वीडियो को दिखाने के लिए दो और पत्रकारों इशिका सिंह और अनुज शुक्ला की गिरफ्तारी हुई। इस वीडियो को आपत्तिजनक माना गया। इस मामले में तीन अन्य लोगों की भी गिरफ्तारी हुई। असंवैधानिक तरीके से हुई गिरफ्तारी के बाद पत्रकारिता जगत के लोग इस मांग के साथ सड़कों पर उतर आए कि कनौजिया को तुरंत रिहा किया जाए।

कनौजिया के खिलाफ उत्तर प्रदेश पुलिस ने भारतीय दंड संहिता की धारा 500 के तहत आपराधिक मानहानी का मामला दर्ज किया था। साथ ही पुलिस ने सूचना प्रौद्योगिकी कानून की धारा-66 भी लगाई थी। बाद में धारा-505 को भी जोड़ा गया। जिस तेजी के साथ पुलिस इस मामले में हरकत में आई, उसे देखते हुए तो यही लगता है कि लोगों के पास ताकतवर लोगों की आलोचना का अधिकार भी नहीं बचा है। हालांकि, उच्चतम न्यायालय ने अभिव्यक्ति की आजादी की रक्षा की और कहा कि व्यक्तिगत आजादी से किसी भी तरह से समझौता नहीं किया जा सकता। अदालत के आदेश पर कनौजिया को रिहा किया गया।

कनौजिया और शर्मा के मामले अकेले नहीं हैं जिन्हें ताकतवर लोगों की आलोचना करने की वजह से परेशान किया गया। पहले यह सुख सिर्फ कार्टून बनाने वालों और हास्य कलाकारों को हासिल था। अब सोशल मीडिया के जरिए ताकतवर लोगों का मजाक उड़ाने भर से लोगों को सजा देने की कोशिश हो रही है। 2016 में भोपाल के एक किशोर को सोशल मीडिया पर कोई आपत्तिजनक सामग्री शेयर करने की वजह से गिरफ्तार किया गया था। अगर कोई नागरिक किसी नेता के बारे में कोई मजाक वाला पोस्ट सोशल मीडिया पर शेयर करता है तो वह अपने विचारों की आजादी का इस्तेमाल करके अपना विरोध दर्ज करा रहा है। ऐसे में क्या सत्ता में बैठे लोगों को यह अधिकार मिल जाता है कि वे इन नागरिकों के खिलाफ ताकत का दुरुपयोग करें?

इतिहास गवाह है कि दुनिया भर में ताकतवर लोग मजाक से चिढ़ते हैं। हैंस क्रिश्चन ऐंडरसन के दि इंपरर न्यू क्लोद से पता चलता है कि राजाओं का मजाक नहीं उड़ाया जाना चाहिए। सत्ता में बैठे हुए लोग इससे डरते हैं। क्योंकि इससे उनकी खामियां उजागर होती हैं। इससे सत्ताधारी लोगों का सच लोगों को पता चलने लगता है। इसमें इतनी क्षमता है कि ताकतवर लोगों की शक्ति घट सकती है।

इस लिहाज से देखें तो मजाक दोधारी तलवार है। इससे एक तरफ जहां ताकतवर लोगों की शक्तियां कम होती हैं तो वहीं दूसरी तरफ इससे पीड़ित लोगों की स्थिति और खराब हो सकती है। कमजोर लोगों का मजाक तब तक उड़ाया जाता रहा है जब तक यह सामान्य न हो जाए। नाजी जर्मनी में यहूदियों की ‘लंबी नाक’ का मजाक उड़ाया जाता था। वहीं साम्राज्यवादी भारत में ‘स्त्रैण बंगाली’ और ‘क्रूर गोरखा’ कहकर मजाक उड़ाया जाता था। इससे सामाजिक तौर पर एक वर्ग में शर्म पैदा करने की कोशिश होती है। इस तरह से देखें तो इसका इस्तेमाल ताकतवर लोगों ने किसी खास वर्ग को शर्मसार करने के लिए किया।

इसलिए मजाक की राजनीति का मूल्यांकन जरूरी है। कनौजिया ने एक ऐसा वीडियो शेयर किया था जिसमें एक परेशान महिला आदित्यनाथ के स्नेह का दावा कर रही थी। इसी आधार पर कनौजिया ने एक मजाक किया था। ऐसे वीडियो लोगों को हंसा तो सकते हैं लेकिन यह उस महिला की कीमत पर होगा। इससे कनौजिया का यह कदम भेदभाव वाला लगता है। क्योंकि इससे उस महिला की स्थिति और खराब होगी। अगर एक तरह के शोषण का इस्तेमाल दूसरे तरह के शोषण का मजाक उड़ाने के लिए किया जाता है तो वह आलोचना गलत है। इसलिए कनौजिया की बात गलत कही जा सकती है। क्योंकि इसमें उस महिला की पीड़ा का इस्तेमाल वे अपनी राजनीति लक्ष्यों को हासिल करने के लिए कर रहे हैं। उन्हें ऐसा कहने का अधिकार है लेकिन वे इस जिम्मेदारी से नहीं बच सकते कि मजाक में भी संवेदनशीलता जरूरी है।

क्या पुलिस ने कनौजिया की टिप्पणी पर अति सक्रियता इसलिए दिखाई कि उसे मजाक की ताकत का अहसास है? अभी के राजनीतिक विमर्श में आलोचना की जगह सीमित है। असहमति की संभावना भी घटती जा रही है। ऐसे में शासन की ओर से होने वाला शोषण बढ़ेगा। इससे बचने का एक तरीका यह है कि रणनीतिक ढंग से हास्य का इस्तेमाल किया जाए। 1997 में स्टीवन पींकर ने हास्य की ताकत को पहचानते हुए कहा था कि अगर दबी-छिपी हंसी में लोग शामिल होने लगें तो इससे यह पता चलता है कि सभी ने चीजों को समझा है और इससे यह भी होता है कि कोई एक व्यक्ति शिकार नहीं बन पाता क्योंकि भीड़ को सजा दे पाना आसान नहीं है। 

अगर हास्य का विस्तार बहुत अधिक हो जाए तो संभव है कि ताकतवर लोगों को की शक्तियां छिन्न हो जाएं?

Updated On : 20th Jun, 2019

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